वासिङ्टन, २६ आसिन : विश्वव्यापी बहुआयामिक गरिबीके सूचकाङ्क सन् २०१० मे सुरु भेलाक बाद पहिल बेर बढ़ल अइछ । संयुक्त राष्ट्र संघीय विकास कार्यक्रम (युएनडीपी) के आइ सार्वजनिक प्रतिवेदनअनुसार विश्वभैर तीव्र गरिबीमे बाँइच रहल नागरिकके संख्या एक अरब २० करोड़ पहुँचल अइछ ।
युएनडीपी आ अक्सफोर्ड विश्वविद्यालयके गरिबी तथा मानव विकाससम्बन्धी अनुसन्धान केन्द्र तैयार कएने सन् २०२६ के वार्षिक प्रतिवेदनअनुसार बितल सालके तुलनामे तीव्र गरिबीमे बाँचैबला नागरिकके संख्या पाँच करोड़ १५ लाखसँ बढ़ल अइछ ।
युएनडीपीके प्रशासक अलेक्जान्डर डे क्रोले गरिबीमे भेल वृद्धिकेँ विश्वके लेल गम्भीर चेतावनीके रूपमे लेबाक चाही बतौलैन । हुनक कहब अनुसार गरिबीमे रहल एक अरब २० करोड़ लोक भोकमरी, विद्यालय शिक्षासँ वञ्चित होबाक अवस्था तथा स्वच्छ पाइन आ बिजलीके अभावजेहन एक दोसरसँ जुड़ल समस्याके सामना क रहल अइछ ।
प्रतिवेदनअनुसार तीव्र गरिबीमे रहल आधासँ बेसी बालबालिका अइछ । यद्यपि, गरिबीमे बाँचैबला लोकके कुल संख्या बढ़बाक प्रमुख कारण जनसङ्ख्या वृद्धि रहल युएनडीपी जनौलक अइछ । प्रतिवेदनमे समेटल गेल एक सओ ८ विकासोन्मुख देशमध्ये १३ देशमे मात्रे जनसङ्ख्या वृद्धिसँ सम्बन्धित नयाँ तथ्याङ्क उपलब्ध रहल उल्लेख अइछ ।
कुल सङ्ख्या बढ़लाक बादो गरिबी न्यूनीकरणमे किछ देश उल्लेखनीय प्रगति कएने अइछ । बितल १५ सालमे ३३ देश बहुआयामिक गरिबीमे बाँचैबला जनसङ्ख्याके अनुपात आधा घटौलक अइछ । ओइमध्ये उपसहारा अफ्रिकाके छटा देश अइछ । चीन आ भियतनामसहित एसियाली देशसभ गरिबी कम करबाक लेल तीव्र प्रगति कएने प्रतिवेदनमे उल्लेख अइछ ।
प्रतिवेदनअनुसार इजिप्ट, नेपाल आ ताजिकिस्तानमे गरिबीके दर तथा बहुआयामिक गरिबीमे बाँचैबला नागरिकके संख्या दूनु उल्लेखनीय रूपमे घटल अइछ । अङ्गोला आ जाम्बियामे सेहो गरिबीके दर घटलाक बादो जनसङ्ख्या वृद्धिके कारण गरिबीमे रहल नागरिकके कुल संख्या बढ़ल अइछ ।
प्रतिवेदनमे प्रयोग कएल गेल बहुआयामिक गरिबी सूचकाङ्क आम्दानीकेँ मात्रे आधार नै मानल जाइत अइछ । अइसँ पर्याप्त आवास, सरसफाइ, बिजुली, खाना बनाबैबला इन्धन, पोषण तथा शिक्षामे पहुँचके अवस्थासमेत मूल्याङ्कन कएल जाइत अइछ ।रासस/एएफपी)














